विटामिनों की खोज कब और कैसे हुआ ?
विटामिनों की खोज
सर्व प्रथम विटामिनों की खोज सन् 1912 ई. में हुई थी। उसके पूर्व चिकित्सा विज्ञानी भोजन में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाड्रेट्स तथा खनिज लवण आदि के बारे में जानते थे। अब तक के शोध यह बताते थे कि प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट्स तथा खनिज लवण आदि की उपस्थिति के बावजूद मनुष्य रोगी होता था, आखिर क्यों? इसी प्रश्न के उत्तर के परिणामस्वरूप दो महान वैज्ञानिक थे - 'डॉपकिन्स' तथा 'एजिकमैन' वैज्ञानिकों ने कई वर्षों तक कैदियों, समुद्र में लंबे समय तक रहने वाले लोगों तथा पर्वतारोहियों के खान-पान और उनको होने वाले रोगों के सदंर्भ की विस्तृत जाँच की, तो पाया कि प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट्स तथा खनिज लवणों के बावजूद इन लोगों के शरीर में अनेक रोग विद्यमान थे। इसी खोज के परिणामस्वरूप जो नये तत्त्व ज्ञात हुए, उनका नाम उन दोनों वैज्ञानिकों ने विटामिन रखा। यह शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है। ग्रीक भाषा में 'विटा' का अर्थ होता है 'जीवन' और 'मिन' का अर्थ होता है 'तत्त्व', इस प्रकार दोनों को मिलाकर समझें तो इसका सीधा अर्थ निकलता है जीवन तत्त्व। जीवन तभी संभव है, जब शरीर में जीवनी शक्ति हो। चिकित्सा वैज्ञानिकों ने देखा कि सूर्य के प्रकाश में पत्तेदार पेड़-पौधों तथा फलों, सब्जियों में तो विटामिन विद्यमान है, लेकिन विटामिन, मांस, अंडे, मछली, दूध, यकृत, जिगर आदि में भी होते हैं। इस पर हुए शोध कार्यों से यह पता चला कि विटामिनयुक्त वनस्पतियाँ, इन पशुओं का आहार बनती है। इन्हें खाने से पशुओं के शरीर में विटानिम मिलते हैं तथा इन पशुओं का मांस आदि खाने से उसमें व्याप्त विटामिन मनुष्य शरीर में पहुँचकर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।
चिकित्सा वैज्ञानिकों के शोध कार्यों से जाहिर हो चुका है कि मनुष्य शरीर को स्वस्थ रखने के लिए साफ-सुथरे भोजन के साथ विटामिनों की भी आवश्यकता होती है। यदि शरीर एक किला है, तो विटामिन उस किले के सुरक्षा प्रहरी कहे जा सकते हैं, जो उसे दिन-रात मेहनत करके सुदृढ़, मजबूत बनाये रखते हैं। यदि शरीर को क्रियाशील इंजन मान लें, और विटामिन को उस इंजन के लिए जरूरी ईंधन है। यह सच है कि विटामिन शरीर को निस्तेज होने से बचाते हैं। यदि मनुष्य शरीर को आवश्यक विटामिन जीवन भर मिलते रहें, तो मनुष्य ईश्वर की दी हुई आयु से 10-20 वर्ष अधिक जी सकता है।