ग्लूकोज का आविष्कार एवं खोज किसने किया ?
ग्लूकोज
ग्लूकोज का सेवन शरीर में पानी की कमी को दूर करने तथा ताकत प्राप्त करने के लिए होता है। 1811 में फ्रांस के एक रसायन वैज्ञानिक किरचोफ को अपने किसी प्रयोग के लिए गोंद की जरूरत थी। उन्हें एकदम से गोंद नहीं मिल पाया। अतः किरचोफ को मालूम था कि यदि स्टॉर्च को शुष्क अवस्था में आग पर गर्म करें तो गोंद जैसा पदार्थ प्राप्त होता है। किरचोफ ने तुरंत ही स्टॉर्च से गोंद प्राप्त करने की सोची। किरचोफ ने जब गोंद को प्राप्त करने के लिए शुष्क स्टॉर्च को सल्फ्यूरिक ऐसिड (तनु) के साथ उबाला। कुछ देर उबालने के बाद उन्होंने प्लेट की ओर देखा तो उसमें जो विलयन शेष बचा, उसमें गोंद के गुण तो थे, लेकिन स्वाद में वह मीठा भी था।
बाद में जब आयोडीन-परीक्षण किया गया तो मालूम हुआ कि विलयन का समस्त स्टॉर्च शर्करा में बदल गया। इस प्रकार 'ग्लूकोज' का आविष्कार हुआ। किरचोफ की इस खोज का लाभ सबसे पहले फ्रांस को मिला। उन दिनों फ्रांस अंग्रेजी सेना के नाविकों से घिरा हुआ था। उनके पास तक आसानी से शक्कर पहुँचाना मुश्किल था। इसलिए किरचोफ की स्टॉर्च से शर्करा प्राप्त करने की विधि प्रचलित हुई। 1903 में प्राडस्ट नामक वैज्ञानिक ने भी अंगूर से ग्लूकोज का निर्माण किया था। अंगूर से जब ग्लूकोज बनाया जाता था तो काफी महँगा पड़ता था। इसलिए किरचोफ की विधि ही सबने पसंद की।