थर्मामीटर का आविष्कार एवं खोज किसने किया ?

 थर्मामीटर का आविष्कार एवं खोज किसने किया ?


थर्मामीटर का आविष्कार एवं खोज किसने किया ?


थर्मामीटर विश्व का सबसे पहला उपकरण है जिससे गर्मी या तापमान का पता लगाया जा सकता है। इस उपकरण से पहले तापमान को नापने का कोई साधन नहीं था।

थर्मामीटर काँच का बना उपकरण है, इसके अन्दर पारा नाम की एक धातु होती है, जो गर्मी पाकर फैलती है। काँच की बाहरी सतह पर तापमान मापने के लिए संख्याएँ लिखी रहती हैं, जिनसे गर्मी को नापा जा सकता है। इसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक गैलीलियो ने बनाया था और तब यह थर्मामीटर नहीं बल्कि 'थर्मोस्कोप' के नाम से जाना जाता था। बाद में गैलीलियो के साथी सान्टोरियो ने ट्यूब पर निशान लगा पैमाना लगा दिया। इससे पानी को नापने की जरूरत खत्म हो गयी और प्रयोगशाला के बाहर भी इसका उपयोग करना संभव हो गया।

थर्मामीटर प्रायः दो प्रकार के होते हैं- एक वे जो स्पर्श से गर्मी का पता लगाते हैं और दूसरे वे जो वातावरण की गर्मी को नापते हैं। स्पर्श से गर्मी को नापने वाला थर्मामीटर बुखार देखने के काम आता है। इसलिए उसे मुँह के अन्दर जीभ के नीचे दबाकर रखते हैं। जीभ हमारे शरीर का एक ऐसा भाग है जिस पर बाहरी वातावरण का असर नहीं पड़ता और हमें शरीर के अन्दर के सही तापमान का पता चल जाता है। वातावरण का तापमान नापने के थर्मामीटरों में दो सूक्ष्मनली होती हैं, जिसमें नली में न्यूनतम तापमान का ऊपर का पारा रुक जाता है, जो वातावरण न्यूनतम तापमान को दर्शाता है। ठीक उसी प्रकार दूसरी नली का पारा ऊपर चढ़ता है और अधिकतम तापमान दर्शाकर वहीं रुक जाता है।

एक नली का पारा वातावरण के अनुसार चढ़ता, उतरता है। थर्मामीटर का निचला सफेद भाग इसलिए मुड़ा हुआ रहता है कि स्पर्श व वातावरण की गर्मी पाकर फैला हुआ पारा एकदम नीचे न उतर जाये, ताकि सही तापमान नापा जा सके। थर्मामीटर में इस क्रिया के लिए एक हवा का बुलबुला भी होता है जो पारे को नीचे उतरने से रोकता है, इसका नुकीला चमकीला भाग किसी चीज से स्पर्श पाकर तापमान बताने के लिए पारे को ऊपर भेजना शुरू करता है। थर्मामीटर का पृष्ठभाग बहुत ही बारीक काँच का बना होता है, जबकि शेष भाग लेसदार मोटे काँच का बना होता है। तापमान पाकर पारे की पतली लकीर खिंच जाती है, जो लेसदार काँच से काफी मोटी होती है। सामान्य व्यक्ति का तापमान 97 डिग्री फारेनहाइट से लेकर 98.4 डिग्री फारेनहाइट होता है। थर्मामीटर का ताप 33 डिग्री सेन्टीग्रेड से 42 डिग्री सेन्टीग्रेड तक तथा 92 डिग्री फारेनहाइट तक होता है।

17 वीं शताब्दी के प्रारंभ में टस्कैनी के ग्रेड डयूक फर्डीनेक द्वितीय ने एल्कोहल के प्रयोग से अपना थर्मामीटर बनाया था, परन्तु वह पूर्ण रूप से उपयुक्त नहीं था। इसलिए एल्कोहल के स्थान पर पारे का उपयोग करके सन् 1714 में जर्मन के वैज्ञानिक ग्रेब्रियल डेनियल फारेनहाइट ने हॉलैण्ड में आधुनिक थर्मामीटर बनाया।
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