पैराशूट का आविष्कार एवं खोज किसने किया ?
पैराशूट का आविष्कार एवं खोज किसने किया ?
पैराशूट का आकार एक बड़ी छतरी के जैसा होता है। आम तौर से यह चौड़ाई में 24 फुट के लगभग होता है। यह इतना अधिक फैल जाता है कि हवा भी इसमें से आसानी से नहीं निकल सकती।
पैराशूटों का अधिक प्रयोग हवाई जहाजों में होता है। वायुयान का चालक अपने हवाई जहाज को खतरे की हालत में देखकर पैराशूट के सहारे कूद कर धीरे-धीरे धरती पर उतर सकता है। युद्धकाल में सैनिक पैराशूट के सहारे ऐसे स्थानों पर उतर सकते हैं जहाँ स्थल या जलमार्ग से आसानी से नहीं पहुँचा जा सकता। जिन सैनिकों को पैराशूट से उतरने की ट्रेनिंग दी जाती है, उन्हें छतरीधारी सैनिक या पैराटूपर' कहा जाता है। युद्ध या शान्ति दोनों अवस्थाओं में जो लोग कहीं पर फंसे रह जाते हैं, उन्हें रसद पहुँचाने में पैराशूट बहुत सहायक सिद्ध होते हैं। जंगलों में आग बुझाने वालों को भी पैराशूट द्वारा रसद पहुँचाई जा सकती है। गुब्बारों द्वारा आकाश में बहुत ऊँचाई पर पहुँचाए गये मौसम-मापक यंत्रों या दूसरे वैज्ञानिक यंत्रों को भी पैराशूट की सहायता से धरती पर उतारा जा सकता है। कभी-कभी जेट विमान धरती पर उतरने के लिए पैराशूटों का उपयोग करते हैं।
निश्चय ही, एक चालक जिस समय अपने जहाज में बैठा हो तो वह अपने चारों ओर पैराशूट फैलाकर नहीं बैठा रह सकता। पैराशूट का मुड़ा रहना जरूरी है। लेकिन पैराशूट को इस तरह सजाकर रखा जाता है कि यह आसानी से खुल सके। विमानचालक का पैराशूट उसकी पोशाक में ही लगा रहता है। कुछ पैराशूट अपने आप खुल जाते हैं। लेकिन अनेक स्थितियों में चालक को अपना पैराशूट स्वयं ही खोलना होता है। जब चालक अपने विमान से कूदता है तो वह अपने को तब तक नीचे गिरने देता है जब तक उसे इस बात का निश्चय नहीं हो जाता कि अब वह विमान की लपेट से काफी नीचे आ गया है। इसके पश्चात् वह पैराशूट में लगी हुई एक डोरी को खोल देता है।
पैराशूट के ऊपरी सिरे पर एक छोटा सूराख बना होता है, जिससे होकर पैराशूट में भरी हुई हवा धीरे-धीरे निकलती है। इस सूराख से पैराशूट का उतरना सुस्थिर हो जाता है और उसके उलटने का खतरा कम हो जाता है। पैराशूट नायलोन या रेशम जैसे किसी महीन व मजबूत कपड़े से ही बनाये जा सकते हैं।