चलती रेल में गेंद हाथ में क्यों आती है?
चलती रेल में गेंद हाथ में क्यों आती है?
👉 ऐसा लगता जरूर है कि रेलगाड़ी के डिब्बे से उछाली गेंद, उछालने वाले व्यक्ति के पीछे गिरेगी क्योंकि गेंद को ऊपर जाने और नीचे आने में कुछ समय लगेगा और इस समय में गेंद उछालने वाला व्यक्ति रेलगाड़ी के साथ आगे बढ़ जाएगा। लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है। आइए जानें कि ऐसा क्यों होता है? चलती रेलगाड़ी में रखी सभी वस्तुएं रेलगाड़ी के साथ ही गति करने लगती हैं। रेलगाड़ी में लगे पंखे, उसमें बैठी सवारियां, गेंद और गेंद उछालने वाला व्यक्ति सभी कुछ रेलगाड़ी के वेग से गतिशील होते हैं। जब गेंद ऊपर फेंकी जाती है, तो रेलगाड़ी का वेग भी इसके साथ निहित होता है। गेंद को ऊपर फेंकने पर इसके क्षैतिज वेग के साथ-साथ ऊर्ध्वाधर वेग और जुड़ जाता है। रेल में चलने वाले यात्रियों को इसकी क्षैतिज गति दिखाई नहीं देती। गेंद केवल ऊपर-नीचे जाती दिखती है।
रेल से बाहर जमीन पर खड़ा व्यक्ति इस गेंद को परवलयी रास्ते से जाता हुआ देखेगा, क्योंकि उसे क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों ही गतियां दिखाई देती हैं। वास्तव में सभी गतियां सापेक्ष होती हैं। यही कारण है कि रेलगाड़ी में उछाली गई गेंद की गति दो दर्शकों को भिन्न-भिन्न दिखती हैं।