लाल गरम लोहा पानी में बुझाने पर कठोर क्यों हो जाता है?
लाल गरम लोहा पानी में बुझाने पर कठोर क्यों हो जाता है?
👉 सामान्यतः पदार्थ परमाणुओं और अणुओं से मिलकर बने होते हैं जो हर पदार्थ में अलग-अलग होते हैं। जब हम किसी पदार्थ को गरम करते हैं तो उसके परमाणु और अणु एक-दूसरे से अलग हटने लगते हैं। लोहा मिश्र धातु है। इसे जब गरम करते हैं तो इसके अणुओं और परमाणुओं की क्रमबद्धता एवं संरचना बदलने लगती है। यदि गरम किए हुए पदार्थ को धीरे-धीरे ठंडा होने देते हैं तो उनके परमाणु अपनी वास्तविक अवस्था में आने में समर्थ होते हैं। लेकिन यदि उन्हें अचानक ठंडा किया जाए तो परमाणु अपनी वास्तविक अवस्था में आने में असमर्थ होते हैं और वे खिंचे-के-खिंचे रह जाते हैं। इस स्थिति के होने पर धातुएं कठोर होने लगती हैं। इसीलिए उच्च कठोर तन्यतावाली वस्तुएं बल लगाने पर मुड़ने के बजाय टूट जाती हैं, लेकिन कम तन्यतावाली स्टील बल लगाने पर टूटने के बजाय मुड़ जाती है।
जब लोहा इतना गरम किया गया हो कि वह गरम होते-होते लाल पड़ गया हो, और ऐसे लाल गरम लोहे को जब अचानक पानी में डालकर बुझाया जाता है, अर्थात् ठंडा किया जाता है तो वह अपनी क्रिस्टल संरचना में परिवर्तन; अर्थात् परमाणुओं की क्रमबद्धता बदल जाने से कठोर हो जाता है।