दया का फल | story in hindi | hindi kahaniya | best hindi kahaniya

 दया का फल | story in hindi | hindi kahaniya | best hindi kahaniya


दया का फल

बादशाह सुबुक्तगीन पहले बहुत गरीब था। वह एक साधारण सैनिक था। एक दिन वह बंदूक लेकर, घोड़े पर बैठकर जंगल में शिकार खेलने गया था। उस दिन उसे बहुत दौड़ना और हैरान होना पड़ा। बहुत दूर जाने पर उसे एक हिरनी अपने छोटे बच्चे के साथ दिखायी पड़ी। सुबुक्तगीन ने उसके पीछे घोड़ा दौड़ा दिया।

हिरनी डरके मारे भागकर एक झाड़ी में छिप गयी; लेकिन उसका छोटा बच्चा पीछे छूट गया। सुबुक्तगीन ने हिरनी के बच्च को पकड़ लिया और उसके पैर बाँधकर घोड़े पर उसे लाद लिया। बहुत ढूँढ़ने पर भी जब उसे हिरनी नहीं मिली तो उस बच्चेको लेकर ही वह लौट पड़ा।

हिरनी ने देखा कि उसके बच्चे को शिकारी बाँधकर लिये जा रहा है। वह अपने बच्चे के मोह से झाड़ी से निकल आयी और सुबुक्तगीन के घोड़े के पीछे-पीछे दौड़ने लगी। दूर जाकर सुबुक्तगीन ने पीछे देखा। अपने पीछे हिरनी को दौड़ते देख उसे आश्चर्य हुआ और दया आ गयी। उसने उसके बच्चे के पैर खोलकर घोड़े से उतार दिया। हिरनी प्रसन्न होकर अपने बच्चे को लेकर भाग गयी।

उस दिन घर लौटकर जब रातमें सुबुक्तगीन सोया तो उसने एक स्वप्न देखा। उससे कोई देवदूत कह रहा था- 'सुबुक्तगीन! तूने आज एक गरीब हिरनी पर जो दया की है, उससे प्रसन्न होकर परमात्मा ने तेरा नाम बादशाहों की सूचीमें लिख लिया है। तू एक दिन बादशाह बनेगा।'

सुबुक्तगीन का स्वप्न सच्चा था। वह आगे चलकर बादशाह हुआ। एक हिरनी पर दया करने का उसे यह फल मिला। जो जीवों पर दया करता है, उसपर भगवान् अवश्य प्रसन्न होते हैं।
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