अंतरिक्ष यान छोड़ने पर उलटी गिनती क्यों की जाती है?
अंतरिक्ष यान छोड़ने पर उलटी गिनती क्यों की जाती है?
👉 जब हम साइकल की भी सवारी करते हैं, तो सवारी करने से पहले अच्छी तरह जांच-पड़ताल करते हैं कि उसमें हवा, ब्रेक इत्यादि ठीक हैं या नहीं। ठीक इसी तरह अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में छोड़ने से पहले रॉकेट के सभी कल-पुरजों की जांच करना आवश्यक होता है। अंतरिक्ष उड़ान में अरबों-खरबों रुपए के उपकरण लगे होते हैं। किसी भी जरा-सी बाल बराबर खराबी के कारण पूरी उड़ान स्वाहा हो सकती है, जिससे भारी हानि हो जाती है। इसलिए अंतरिक्ष यान छोड़ने के लिए रॉकेट सीढ़ी-दर-सीढ़ी प्रक्रम में बनाए जाते हैं। अर्थात् रॉकेट का एक प्रक्रम दूसरे प्रक्रम से एक-एक करके सहयोजित होता है। अतः रॉकेट को छोड़ने से पहले सभी प्रक्रमों की जांच करने के लिए प्रत्येक प्रक्रम को जांचा-परखा जाता है। जहां कहीं भी, जिस प्रक्रम में कोई खराबी नजर आती हैं वहां उसकी मरम्मत की जाती है और उस प्रक्रम के पूरी तरह ठीक होने पर ही आगे के प्रक्रम की जांच प्रारंभ की जाती है, और पूरे रॉकेट के सभी प्रक्रम एक-एक करके जांच लिये जाते हैं।
यह क्रिया एक से प्रारंभ होकर दो, तीन, चार की ओर भी बढ़ाकर पूरी की जा सकती थी; लेकिन इस अवस्था में हम चाहे कितने ही प्रक्रम जांच लेते, पूरी जांच की सही स्थिति मालूम नहीं पड़ती। इसीलिए नीचे से ऊपर के बजाय ऊपर से नीचे की ओर जांच की जाती है। इसका लाभ यह होता है कि जब प्रक्रमों को जांचते-जांचते शून्य पर आते हैं, तो पूरी तरह आश्वस्त हो जाते हैं कि सभी प्रक्रम ठीक हैं। इसीलिए अंतरिक्ष यान उड़ाते समय उलटी गिनती प्रारंभ की जाती है और शून्य पर आते ही रॉकेट उड़ाया जाता है।