प्राथमिक कक्षाओं में लेखन कौशल के विकास के विभिन्न तरीकों का उल्लेख कीजिए।

 प्राथमिक कक्षाओं में लेखन कौशल के विकास के विभिन्न तरीकों का उल्लेख कीजिए।

प्राथमिक कक्षाओं में लेखन कौशल के विकास के विभिन्न तरीकों का उल्लेख कीजिए।


प्रश्न – प्राथमिक कक्षाओं में लेखन कौशल के विकास के विभिन्न तरीकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर- प्राथमिक कक्षाओं में लेखन-कौशल के विकास के निम्नलिखित तरीके हैं—
(i) चित्र या रेखाचित्र से कहानी बनाकर लिखना ।
(ii) अपनी रुचि की चीजों के बारे में लिखना ।
(iii) कहानी को आगे बढ़ाकर लिखना ।
(iv) लयात्मक शब्दों से तुकबन्दी करना ।
(v) श्रुतिलेख ।
(vi) सुलेख ।
(vii) अनुलिपि ।

(i) चित्र या रेखाचित्र से कहानी बनाना

इसमें छात्रों को एक रेखाचित्र दिया गया है। अध्यापक उससे सम्बन्धित कतिपय प्रश्न पूछकर कहानी की रूपरेखा से छात्रों को परिचित करा देता है । तत्पश्चात् छात्रों को कहानी लिखने के लिए कहता है ।

(ii) अपनी रुचि की चीजों के बारे में लिखना

इस विधि के अन्तर्गत अध्यापक छात्रों से उनकी रुचि के विषय में पूछता है । तत्पश्चात् उन्हें अपनी-अपनी रुचि की किसी चीज के विषय में निबन्ध लिखकर लाने के लिए आदेशित करता है। उसी दिन या दूसरे दिन लिखी गई पंक्तियों की जाँच करके प्रत्येक को आवश्यक फीडबैक देता है ।

(iii) कहानी को आगे बढ़ाकर लिखना

इसके अन्तर्गत अध्यापक श्यामपट्ट पर कोई अधूरी कहानी लिखता है। फिर छात्रों से कहता है कि वे कहानी को अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारें तत्पश्चात् उस कहानी को अपनी सोच व अनुमान के आधार पर पूरा करें। जब सभी छात्र कहानी भी लिख चुके होते हैं तब अध्यापक श्यामपट्ट पर अधूरी कहानी को पूरा करके लिखता है और छात्र श्यामपट्ट पर लिखी अपनी कहानी से तुलना करते हैं और अपनी त्रुटियों में सुधार करते हैं ।

(iv) लयात्मक शब्दों से तुकबन्दी करना

अध्यापक कुछ शब्द श्यामपट्ट पर लिखता है और छात्र उन्हें अपनी अभ्यास पुस्तिका में उतारते हैं। अध्यापक के आदेश पर वे उन शब्दों के आगे ऐसे शब्द लिखते हैं जिनकी पूर्वलिखित शब्दों से लयात्मक तुकबन्दी मिलती हो ।

जैसे –
रेला ………..(मेला, चेला)
पुन: ……….(अतः, नमः)
सवेरा ………(तबेला, नवेला)
मृग …………(नृप, गृह)
पैसा ………..(जैसा, तैसा)

(v) श्रुतिलेख

श्रुतिलेख के अन्तर्गत अध्यापक बोलता जाता है और बालक सुनकर लिखते जाते हैं। कहीं-कहीं पर श्रुतलेख के लिए सीतावाद्य (ग्रामोफोन) या ध्वनि-लेख (टेपरिकार्डर) का भी प्रयोग होता है । सुनकर लिखे जाने के कारण श्रुतलेख कहा जाता है ।

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